पांच लाख की पोशाक भी पहनते हैं बांकेबि
वृंदावन,  सामान्य दिनों में बांके बिहारी जी 10 से लेकर 50 हजार रुपये मूल्य तक की पोशाक पहनते हैं, जबकि हरियाली तीज, अक्षय तृतीया, जन्माष्टमी और शरद पूर्णिमा को वे पांच लाख रुपये तक की विशेष पोशाक पहनते हैं। 13 मई को अक्षय तृतीया पर बांके बिहारी जी धोती और पटका धारण करेंगे। शरद पूर्णिमा पर श्वेत रंग के वस्त्र पहनेंगे। इस दिन कट काछनी, बांसुरी और मोर-मुकुट भी धारण करेंगे। ठाकुर जी जन्माष्टमी पर केसरिया रंग की पोशाक, हरियाली तीज पर हरे रंग की पोशाक पहनते हैं। इसी प्रकार से वसंत पंचमी पर वसंती रंग, दीपावली पर लाल रंग की पोशाक पहनते हैं। बांके बिहारी जी गर्मी में शिफॉन-जॉर्जेट व सर्दी में सिल्क-जामावार कपड़े से बनी पोशाक पहनते हैं। इन उत्सवों पर भगवान की पोशाक तैयार कराने के लिए एक माह पूर्व बुकिंग करानी होती है।
 
ऐसे बनती है लाखों की पोशाक
 
खास मौकों पर ठाकुर जी जो पोशाक पहनते हैं, वह गैरमामूली होती है। उनमें बेशकीमती पत्थरों, अमेरिकन जरकिन, हीरे और मोती की टंकाई होती है। सिलाई सोने-चांदी के तारों से की जाती है। कारीगरी इतनी महीन होती है कि एक पोशाक बनने में एक माह से भी ज्यादा का वक्त लग जाता है। खास बात यह है कि ये पोशाक मशीन से नहीं, बल्कि हाथ से बनती हैं। इनकी कारीगरी भी काफी महंगी है। यजमान गोस्वामी से लेते हैं अनुमति
 
देशभर में रहने वाले भक्त बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी और प्रबंध तंत्र से जुड़े लोगों से राय, अनुमति लेने के बाद गोटेवाले परिवार से पोशाक बनवाते हैं। पहले मूर्ति का साइज बताना होता है। इसके बाद ही विशेषज्ञ पोशाक तैयार करते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी बना रहे पोशाक
बांके बिहारी जी को दिल्ली में गोटेवाले वाले परिवार द्वारा तैयार की जाने वाली पोशाक पसंद है। गोटेवाला परिवार चार पीढि़यों से पोशाक बना रहा है। राकेश गोटेवाला ने बताया कि उनकी बेटी इस परंपरागत कार्य में चौथी पीढ़ी की सदस्य है। उसने फैशन डिजायनिंग की पढ़ाई भी की है।
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