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Rang Panchami

Rang Panchami
रंग पंचमी, होली पर्व के समापन दिवस के रूप में मनाया जाता है। रंग पंचमी में रंगोत्सव द्वारा पंचतत्वों को क्रियाशील करते हुए जगाया किया जाता है। रंग पंचमी के दिन का धार्मिक दृष्टि से भी बड़ा महत्व बताया गया है, इसको देवपंचमी के नाम से भी जाना जाता हैं क्योंकि इसी दिन देवतागण भी रंगोत्सव मनाते हैं।

रंगपंचमी का एक और प्रचलित नाम श्रीपंचमी भी है, क्योंकि इस दिन देवताओं के साथ रंग गुलाल खेलने से घर में श्री अर्थात धन समृद्धि की वृद्धि होती है। हिंदू विक्रमी सम्वत पंचांग के अनुसार रंग पंचमी का त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को धुलैंडी के तीन दिन बाद मनाया जाता है।

रंगपंचमी के विषय में ऐसी मान्यता भी है कि इस रंग रंगोत्सव से तमोगुण का नाश होता है और जीवन में आनंद की वृद्धि होती है। इस दिन महाराष्ट्र में मछुआरे समुदाय के लोग रंग उत्सव मनाते हैं और पूरनपोली बनाते हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान में भी रंग पंचमी के दिन रंगोत्सव मनाया जाता है।

ऐसी भी मान्यता है कि होलाष्टक के दिन जब कामदेव को भगवान शिव ने भस्म कर दिया तो देवलोक में उदासी छा गई। जिससे चिंतित होकर देवताओं ने जब भगवान शिव से प्रार्थना की तो उन्होंने कामदेव के फिर से जीवित होने का आश्वासन दे दिया। यह सुनकर देवतागण आनंदित हो गए और रंगोत्सव मनाने लगे। देवलोक में प्रसन्नता छा गयी। उसी समय से ही चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को हर साल रंग पंचमी मनाई जाती है।

दरअसल कई जगहों पर होली समेत पांच दिनों तक रंग खेलने की परंपरा है, जिसका अर्थ है कि असल में होली का त्योहार रंग पंचमी के दिन पूर्ण होता है।

जनसामान्य में तो लोगो को रंग के दो दिन ही नजर आते हैं, होली और धुलेंडी। होली के दिन होलिका पूजन किया जाता है और होली के अगले दिन, यानि धुलेंडी पर रंग खेला जाता है। लेकिन भारत में कई जगहों पर होली और धुलेंडी के साथ पांच दिनों तक रंग खेलने की भी परंपरा है।
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